नारी स्वयं मैं एक प्रश्न हूँ

नारी स्वंय मैं,
एक प्रश्न हूँ!
और प्रश्न चिह्न लगा
मेरे वजूद पर,

मैं हूँ भी या नहीं,
या केवल पुरुष का,
एक अंशमात्र हूँ,

तभी तो, 
मेरी स्वतंत्रता,
मेरे अधिकार, 
मेरा षरीर,
मेरा गर्भ,
मेरा निर्णय,

सब पुरुष के अधीन है,
और मैं पराधीन हूँ,
सदियों से,
छटपटाहट है पितृसत्तात्मकता से .........

अभिव्यक्ति की,
विवाह करने की,
गर्भ धारण की,
निर्णय लेने की,
पूर्ण आजादी से ...............

मैं कृतज्ञ हूँ,
अपने अस्तित्व को बचाने के लिए,
और अपने वजूद को, 
अपने ही अंदर तलाषने के लिए .............

नारी स्वंय मैं,
एक प्रश्न हूँ!
और प्रश्न चिह्न लगा
मेरे वजूद पर,

मैं हूँ भी या नहीं,
या केवल पुरुष का,
एक अंशमात्र हूँ,

तभी तो,
मेरी स्वतंत्रता,
मेरे अधिकार,
मेरा षरीर,
मेरा गर्भ,
मेरा निर्णय,

सब पुरुष के अधीन है,
और मैं पराधीन हूँ,
सदियों से,
छटपटाहट है पितृसत्तात्मकता से .........

अभिव्यक्ति की,
विवाह करने की,
गर्भ धारण की,
निर्णय लेने की,
पूर्ण आजादी से ...............

मैं कृतज्ञ हूँ,
अपने अस्तित्व को बचाने के लिए,
और अपने वजूद को,
अपने ही अंदर तलाषने के लिए .............

कुमारी अर्चना
शोधार्थी, राजनीतिशास्त्र विभाग
भागलपुर विश्वविद्यालय, बिहार
शोधार्थी, राजनीतिशास्त्र विभाग
भागलपुर विश्वविद्यालय, बिहार

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