ग़ज़ल- याद माझी का हर पहर आया

याद माझी का हर पहर आया!! 
मुझको जीने का न हुनर आया!!

बेकरारी से देखे रह आँख मेरी,
वादा करके भी न वो जाने जिगर आया!!

कुछ बात तो है महफ़िल में सनम की,
हाय जाकर उधर न कोई इधर आया!!

मिट तो जाती है सब तारीकी मगर,
घर मेरे न नय्यर-ए- असगर आया!! 

खुल गयी दिल के जख्मो की किताब,
आज फिर मेहबूब के शहर आया!!

जिसको 'जाहिद' बहुत तलाश किया,
आइना-ए-दिल में वो नजर आया!!

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जाहिद खान 'जाहिद'
पाली-हरदोई, उत्तर प्रदेश

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