माँ


ओ माँ तुम मुझे यूँ न मारो
पापा-दादी की बातों में आकर
मैं तो आकार ले चुकी हूँ  तेरे भीतर
मैं तेरी साँसों को महसूस करती हूँ
जब पापा तुम पर हाथ उठाते हैं तो
मुझे भी दर्द होता हैं माँ
मैं इंतेजार करती हूँ उस घड़ी का
जब मैं बाहर आऊँगी और तेरी ढाल बन जाऊँगी
तेरे सपनों को मैं साकार करुँगी
तुम करोगी माँ मुझ पर गर्व ऐसा कुछ काम करुँगी
तेरे पपड़ीनुमा होंठों पर मैं मुस्कान लाऊँगी
सूनी-सूनी तेरी आँखों में सपनों के दीप जलाऊँगी
अगर आज तूने मेरी हत्या कर दी
तो कैसे देखूँगी मैं ये दुनिया,जिस दुनिया में तुम रहती हो माँ
मैंने सुना है वह बहुत सुंदर हैं, मैं भी एक बेटे का पफर्ज निभाऊँगी
माना तेरा वंश नहीं चला सकती
पर माँ मैं भी तेरा मान बढ़ाऊँगी।

आशा रौतेला मेहरा

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