मैं इतिहास बनना चाहती हूँ

लिए मुझे अपना इतिहास बनना होगा,
मेरी कलम कभी रूके नहीं बस चलती रहे,
जिन्दगी की सांसो के अन्तिम क्षणों तक,

तभी इतिहास पन्नो पर,
मैं कवियत्री कहलाउँगी,
सब कुछ भूल,
सब को भूल,
‘मैं’ को साधना होगा ...................

कुमारी अर्चना
शोधार्थी, राजनीतिशास्त्र विभाग
भागलपुर विश्वविद्यालय, बिहार

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