ग़ज़ल - तुझको समझा न जाना, ज़ाना कोई!!

तुझको समझा न जाना, ज़ाना कोई!!
तेरे जैसा नही है, नही है कोई!!
                
मैं ये कह दूँ तेरा राज़ खुल जायेगा,
तू वो ही है, वो ही है, वो ही!!
                
धोखा आँखों ने खाया है दिलने नही,
ये सही है, सही है,सही है, यही!!
                
जिसने सारे ज़माने को उलझा दिया,
वो तू ही है, तू ही है, तू ही है, तू ही!!
                
जिसने ‘शादाब’ तेरी करी आरज़ू,
उसको राहत, नही है, नही है, कभी!!

शब्बू मालिक 
पाली, हरदोई, उत्तर प्रदेश

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