ग़ज़ल - हम भी तेरे हुए दिल भी तेरा हुआ!!

हम भी तेरे हुए दिल भी तेरा हुआ!!
जुस्तजू का मेरी अब बसेरा हुआ!!

रश्क़ सारा जहाँ हमपे करने लगा,
नाम जब से गुलामो में मेरा हुआ!!
                   
रात कब कट गयी ये पता न चला,
जब भी तेरे ख्यालों का फेरा हुआ!!
                   
रंजो-ग़म ख़ौफ मुझपे है सब बेअसर
तेरी नजरों का हम पे यूँ घेरा हुआ!!
                   
दिल दुनिया मेरी तबसे ‘शादाब’ है
जबसे उल्फत का तेरी सबेरा हुआ!!

शब्बू मलिक 
पाली, हरदोई, उत्तर प्रदेश

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