ऐसी औलाद न दे

मेरे हिस्से में दुनिया का गम लिख दिया!!
नाम मेरे ही सारा सितम लिख दिया!!
जिसको पाला था मैंने बहुत प्यार से,
उसके हाथों ही मुझ पर जुलम लिख दिया!!
जो हर पल रुलायें ऐसे जज़्बात न दे!
कि मौत से बत्तर तू हालात न दे!!
किसी को भी मौला ऐसी औलाद न दे!!
आँखों का कहती थी तारा तुझे!!
बुढ़ापे का कहती थी सहारा तुझे!!
पकड़ कर उँगलियाँ चलना सिखाया था जिनकी,
उन्ही हाथों ने  आज  मारा   मुझे!!
मर्जी है तेरी तू गम दे दे जितना!
जुलम दे दे जितना, सितम दे दे जितना!
पर बेटे की शक्ल में जल्लाद न दे!!
किसी को भी मौला ऐसी औलाद न दे!!
गरीबी में अपनी संभाला तुझे!!
मोहताजी में भी है पाला तुझे!!
लगाकर के सीने से सुलाती थी जिसको,
उसी ने है घर से निकाला मुझे!!
कि जिन्दा उठा ले मुझे मेरे मौला,
फिर कोई माँ ऐसी फ़रियाद न दे!!
किसी को भी मौला ऐसी औलाद न दे!!
बेबस हूँ, कितनी मै लाचार हूँ!
लगता है कि अब मैं गुनाहगार हूँ!! 
उजाड़े जो ममता की बगिया,
तू किसी को भी ऐसा सय्याद न दे!!
किसी को भी मौला ऐसी औलाद न दे!! 
किसी को भी मौला ऐसी औलाद नदे!!
कलीम  'पालवी’
पाली – हरदोई

1 comment:

  1. A very keenly observed work.
    fantastic
    Continue doing same work that u r doing and make us feel proud .

    ReplyDelete