ग़ज़ल - दिल तो तेरा हुआ, अब मैं जाऊँ कहाँ!!

दिल तो तेरा हुआ, अब मैं जाऊँ कहाँ!!
तेरे दर के सिवा सर झुकाऊं कहाँ!!

माना महफ़िल के तेरे मै काबिल नही
उठ भी महफ़िल से तेरी मै जाऊं कहाँ!!
                 
सारी दुनिया से अब में बेगाना हुआ
तेरे दिल के सिवा घर बनाऊं कहाँ!!

मेरे मौला सुन ले तूरुदादे गम
गर नही तो बता मैं सुनाऊं कहाँ!! 

हश्र में राज़ तेरा खुलेगा जरूर
बात है राज़ की ये छु पाऊं कहाँ!!
                
तूने भी गर हमे न सहारा दिया
ठोकरे फिर बता जाके खाऊं कहाँ!!
                
शब्बू मलिक 
पाली, हरदोई, उत्तर प्रदेश

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