मंसूबे होंगे तेरे कामयाब

मंसूबे होंगे तेरे कामयाब हौंसला तो रख
अपने दिल में ख़्वाबों का सिलसिला तो रख

फेंकदे अपने मन से बेदर्द नग्मों को 
अपने दिल में दर्द का एक फ़लसफ़ा तो रख

मैं खुद से जुदा नहीं, लेता विदा नहीं
आऊँगा वक़्त पर काम, ये भरोसा तो रख

नज़रअंदाज़ करने का तेरा अंदाज़ था बड़ा अच्छा
मेरी हर जीत पर अपना वो अंदाज़ बरकरार तो रख

मंसूबे होंगे तेरे कामयाब हौंसला तो रख
अपने दिल में ख़्वाबों का सिलसिला तो रख

बंदिशों की बेड़ियाँ अब कहाँ तेरे क़दमों में 
हसरतों की राह पर एक फैसला तो रख

मेहँदी पैरों में मुझे अच्छी नहीं लगती 
एड़ियों में पड़े छालों के कुछ निशान तो रख

बड़े बुज़दिल हैं वो जो डगमगा जाते हैं 
ज़िंदादिली का अपना एक प्रमाण तो रख

बड़े भयानक सफ़र में हैं वो जो ढूंढ़ते हैं हमसफ़र 
इस सफ़र में तू खुद को साथ तो रख

मंसूबे होंगे तेरे कामयाब हौंसला तो रख
अपने दिल में ख़्वाबों का सिलसिला तो रख।


नेहाल अहमद,
बी.ए. हिंदी ऑनर्स, 
प्रथम वर्ष, 
अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय, 
अलीगढ़  
मो: 09457922265 
thenehalahmad@gmail.com 

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