ग़ज़ल- सितारों की तरह पहचान होना

सितारों की तरह पहचान होना
बहुत लाजिम है ये अरमान होना

बड़ा आसान है मुश्किल हो जाना
बहुत मुश्किल है पर आसान होना

विरह की रात में है जानलेवा
तुम्हारी याद का सामान होना

फरिश्ते या खुदा की क्या जरूरत
अभी काफी है बस इंसान होना

सुकूं देता है अक्सर ही यहाँ पर
समझकर बूझकर नादान होना

जरूरी है शरीअत से भी पहले
मुकम्मल आपका ईमान होना

यही अनमोल हमको है गनीमत
तुम्हारे दिल का इक सुल्तान होना

के. पी. अनमोल
वेब पत्रिका ‘हस्ताक्षर’ में प्रधान संपादक

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