महाभारत


सत्य अभिमन्यु हुआ है 
झूठ हुआ चक्रव्यूह । 
कौरवों की भ्रष्ट सेना 
ने घेर रखी निरीह रूह ।।
न्याय नियंता देखता है 
निर्वत्र बेचारी प्रजा । 
विधि-विधान लाचार हो 
दे रहा सबको सजा ।।
पाँच पांडव होंगे विजेता 
भ्रष्ट कब तक जियेगा । 
एक दिन वो आएगा जब 
मृत्यु का गरल पिएगा ।। 
उठाओ पार्थ गाण्डीव 
मारो जयद्रथ खड़ा है । 
हनन हंता का करो जो 
बन रहा बहु बड़ा है ।।
भारत का यह महाभारत 
क्या कभी होगा खतम ? 
जब सभी नर आर्य बन 
हो जाएँगे उद्यमरतम् ।।
पाश्चात्य तो सूर्यास्त गृह है 
पूर्व में होगा उदय । 
सत्य का सूरज उगेगा 
तभी होंगे सब अभय ।। 

राज वीर सिंह 
तरौंदा कानपुर देहात 

0 comments:

Post a Comment