ग़ज़ल- करके खुद का कभी सामना देखले!!

करके खुद का कभी सामना देखले!!
हुस्नवाले ज़रा आईना देखले!!
                  
क्या बताऊँ मज़ा तेरी तारीफ का
करके खुद ही तू अपनी सना देखले!
                 
हम तो तेरे है, तेरे रहेंगे सदा
करके दिल का मेरे मुआयना!! 
                 
इश्क़ मिटकर भी तेरा रहेगा हमें,
हमको चाहें तू करके फ़ना देखले!!
                  
दिल न मानेगा ‘शादाब’ तेरी कभी
गर जो चाहे तू करके मना देखले!!

शब्बू मलिक 
पाली, हरदोई, उत्तर प्रदेश

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