भविष्यवक्ता

चलते-चलते सहसा उसकी निगाह एक साईनबोर्ड से टकराई | लिखा था , ‘हाथ दिखाइए , भाग्य जानिए – विख्यात ज्योतिषाचार्य सुखानंद पंडित |’ 

उसके कदम उस ओर ही बढ़ गए | 

“हाथ देखिएगा पंडितजी ?” करीब जाकर उसने कहा |

“हाँ हाँ क्यों नहीं |.....शहर की बड़ी बड़ी हस्तियां मुझे हाथ दिखा चुकी है | क्या मजाल कि मेरी एक भी भविष्यवाणी झूठ निकले ...|”

ज्योतिषी की पेशेवर बोली पर उसने हौले से मुस्करा कर अपनी दाहिनी हथेली उसकी ओर बढ़ा दी |

“पहले दक्षिणा !” ज्योतिषी ने खींसे निपोरते हुए उसे याद दिलाया |

“कितना लेते हैं |”

“बीस रूपये मात्र !”

“पंडितजी , आप निश्चिंत रहें | पहले हाथ तो देख लें | दक्षिणा ज़रूर दूंगा |” उसने उसे आश्वस्त किया |

चश्मा चढ़ाकर ज्योतिषी ने उसकी हथेली को अपनी आँखों के करीब ले आया | कुछ पल तक रेखाओं का गौर से मुआयना करने के बाद कहना शुरू किया , “ जजमान , आप नौकरी के लिए बहुत संघर्ष कर रहें हैं ..........रेखाएं कह रही हैं कि इस माह के अन्दर आपकी सारी परेशानियां दूर हो जाएंगी ...बस थोड़ी प्रतीक्षा करें |...एक अच्छी सी नौकरी मिलने ही वाली है |”

वह हंसते हुए मन-ही-मन बुदबुदाया , ‘ नौकरी करते हुए दो साल होने चले पंडित जी |’

आगे ज्योतिषी क्या क्या बकता रहा , उसने कुछ नहीं सुना | जब उसकी धारा प्रवाह बोली पर पूर्णविराम लगा तो झटके से उठा | चलने का उपक्रम करते हुए कहा , “बहुत बहुत धन्यवाद 

पंडितजी ! .....नौकरी लगी तो सबसे पहले आपका मुँह मीठा कराऊंगा | चलता हूँ |” और उसने मुड़कर कदम बढ़ा लिए |

“लेकिन दक्षिणा तो देते जांए जजमान !”

वह रुक गया | मुड़कर ज्योतिषी को निहारा और होठों पर मुस्कान लाते हुए कहा , “ महाराज , आप शहर के मशहूर भविष्यवक्ता हैं | मेरे हाथ की रेखाएं देखकर आप इतना भी नहीं जान पायें कि मैं दिया हुआ वचन कभी नहीं निभाता |” कहकर वह चलता बना | 


मार्टिन जॉन
अपर बेनियासोल, पो.आद्रा, जि. पुरुलिया,
पश्चिम बंगाल 723121, मो.09800940477

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