ग़ज़ल- गुनगुने चैन के ख्यालों में

गुनगुने चैन के ख्यालों में
ढूँढते हैं खुशी भी जालों में

जोकि खुद ही जवाब हों अपना
हमभी शामिल हैं उन सवालों में

शाम कट जायेगी मेरी ऐ दोस्त
तेरी दोपहर के उजालों में

किस कदर भर दिया नशा उसने
जिंदगी के जवान प्यालों में

ताकि ताज़ा हवा रहे आती
हों झरोखे भी कुछ दिवालों में

सादगी की जो है ये हैरानी
कैसे उसको कहें मिसालों में

फूलते इस कदर अंधेरे हैं
रोशनी फँस गयी सवालों में

ऐ 'सुमन' अब तलक तो जिंदा हैं
वे तेरी ख़ुशबुएँ ख्यालों में

लक्ष्मी खन्ना ‘सुमन’

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