यादों का इडियट बॉक्स

 “दिशांत, तुम फिर अपनी कहानियों की किताब लेकर बैठ गएl मेरी बात को कब अपने दिमाग में डालोगे? कितनी बार कहा है तुमसे कि अपने सिलेबस की किताबें भी उठा कर देख लिया करोl अगले महीने तुम्हारी परीक्षाएं भी हैंl” माँ ने थोडा नाराज़ होते हुए अपने १४ साल के बेटे से कहाl “हाँ माँ कुछ देर में सिलेबस का भी पढ़ लूँगाl बड़ी मुश्किल से मिली है मुंशी प्रेमचंद की ये कहानियों की किताबl आपको पता है माँ इसके लिए कितने पापड बेलने पड़े? पूरे १० दिन लगातार लाइब्रेरी गया हूँ तब कहीं जाकर ये किताब मुझे मिल पाई हैl” किताब में अपनी दोनों आँखें चश्मे के साथ गड़ाते हुए दिशांत माँ से बोलाl “हाँ भाई! तुम्हीं तो प्रेमचंद के नाती हो जो इतने ध्यान से अपने बब्बा की किताब में खोपड़ी गडाए हो? अभी तुम पूरे दिन इस किताब में दिमाग लगाए रहना और रात होते ही तुम्हारे नीलेश मिसरा आ जाएँगे तुम्हें कहानी सुनाने, फिर उनसे कहानी सुन लेना और सो जानाl यही काम रह गया है बस तुम्हाराl अपनी पढाई पर तो कतई ध्यान नहीं है और मेरी बात पर भी अब कतई घास नहीं डालता ये लड़काl” बातों-बातों में माँ का पारा चढ़ गया थाl

        दिशांत, विद्या मंदिर में नवें दर्जे का विद्यार्थी है जिसे अपने सिलेबस की हिंदी की किताब छोड़कर बाकी किताबें कम ही रास आती हैंl कहानियों के लिए इस उम्र में जो दीवानगी दिशांत की है, शायद ही किसी बच्चे की होl मुंशी प्रेमचंद, फणीश्वर नाथ ‘रेणु,’ महादेवी वर्मा और न जाने किस-किस की लिखी कहानियाँ और उनकी लिखी किताबें पढ़ कर कंठस्थ कर लीं थीं दिशांत नेl दिशांत के लिए कहानियों की किताबों का सबसे सरल, अच्छा, और नजदीक साधन चौराहे पर बनी सेंट्रल लाइब्रेरी है जहाँ से वो अपनी बचायी हुई पॉकेट मनी से बनवाए गए महीने के लाइब्रेरी कार्ड पर रोज़ एक या दो किताबें पढने के लिए ले आता है और उनको तब तक नहीं छोड़ता जब तक उन्हें पूरा नहीं पढ़ लेताl दिशांत को कहानी लिखने का भी शौक़ हैl साथ ही बिग एफ.एम. पर प्रसारित कार्यक्रम ‘यादों का इडियट बॉक्स विथ नीलेश मिसरा’ भी सुनना नहीं भूलताl लोगों से कहता है कि अगर कहानी सुननी है तो नीलेश मिसरा से सुनोl उनका जवाब नहींl

        “माँ-माँ,कहाँ हो? जल्दी आओl” अपनी माँ को पुकारते हुए दिशांत ने कहाl क्या हुआ?         “इतनी रात गए हल्ला क्यों कर रहे हो बेटा?” माँ बोलींl “आओ माँ बैठोl आज नीलेश माँ और बेटे पर कहानी सुना रहे हैंl कितना अच्छा अंदाज़ है न कहानी सुनाने का इनकाl” बालकनी में चाँद को देखते हुए दिशांतने माँ से कहाl माँ भी आज अपने बेटे का दिल रखने के लिए हेडफोन लगाकर बिग एफ.एम. पर प्रसारित शो ‘यादों का इडियट बॉक्स’ सुनने लगीl चुप्पी और हरकतों के सिलसिले के बीच माँ की गोद में अपना सिर रखते हुए दिशांत ने माँ से कहा- “माँ, मैं भी कहानियाँ लिखना चाहता हूँ, राइटर बनना चाहता हूँ, स्टोरी-टेलर बनना चाहता हूँl” उस क्षण माँ बस दिशांत को एकटक देखती रह गई और सोच के गहरे गर्त में जाकर सोचने लगी कि जो उमर बच्चों के खेलने-कूदने की होती है, उस उमर में दिशांत ने अपने करियर को चुन लिया हैl करियर का चुनाव किया भी तो कैसा? राइटर बनने का, स्टोरी-टेलर बनने काl क्या ये चुनाव ठीक है? आज के ज़माने में लेखकों को पूछता ही कौन है? तिसपर लेखकों की कमाई का भी तो कुछ पता नहीं हैl

        मात्र ७ साल की उम्र में कैंसर की वजह से दिशांत के सिर से बाप का साया उठ गया थाl तब से लेकर आज तक माँ एक फैक्ट्री में काम कर दिशांत और घर की देखभाल कर रहीं हैंl “माँ सोचने लगी कि आर्थिक स्थिति मजबूत न होने के कारण इलाज भी नहीं करवा पायी थी दिशांत के पापा काl दिशांत को डॉक्टर बनाने का इनका सपना कैसे पूरा होगा? क्या जवाब दूँगी मैं दिशांत के पापा को ऊपर जाकर?” सारा दिन दिशांत की माँ के दिलो-दिमाग में ऐसे ही कई सवालों की ऊहा-पोह में निकला जा रहा थाl इसी ऊहा-पोह की वजह से आज फैक्ट्री भी नहीं जा पाई थी वोl तभी अचानक दरवाजे की घंटी बजीl

        माँ ने दरवाजा खोला तो देखा की दरवाजे पर दिशांत खड़ा हुआ थाl “तुम स्कूल नहीं गए? अभी छुट्टी का टाइम तो नहीं हुआ हैl फिर इतनी जल्दी कैसे आ गए?” माँ ने पूछाl अरे माँ! अन्दर तो आने दो बताता हूँ क्या हुआl “स्कूल में आज नीलेश मिसरा आए थेl अगले महीने स्कूली बच्चों के लिए एक स्टोरी राइटिंग कम्पटीशन है बिग एफ.एम. की तरफ से ‘यादों का इडियट बॉक्स विद नीलेश मिसरा’ के लिएl माँ, मैं भी पार्ट लेना चाहता हूँ इस कम्पटीशन मेंl रजिस्ट्रेशन फॉर्म ‘फ्री ऑफ़ कॉस्ट’ हैl और पता है विनर को नीलेश जी के साथ एफ.एम. पर अपनी आवाज़ में स्टोरी कहने का ‘गोल्डन चांस’ भी मिलेगाl प्लीज माँ, मना मत करनाl मैं अपने सपने को पूरा करना चाहता हूँl”

        ...“ठीक है बेटा, कल फॉर्म भर देनाl” बेटे के सपने को ध्यान में रखते हुए माँ ने अपने और उसके पापा के सपने को एक तरफ रखते हुए दिशांत को कम्पटीशन में प्रतिभाग करने की अनुमति देदीl बस इतना सुनना था और दिशांत अपनी माँ के गले से लिपट गया और बोला- “थैंक्स अ लॉट माँl आप दुनिया की सबसे अच्छी और प्यारी माँ होl” माँ ने प्यार से बेटे के माथे को चूम कर और दुलार कर कहा- “मेरा बेटा सबसे अच्छा राइटर और स्टोरी-टेलर बनेगाl”

        अगली सुबह माँ देर से उठीl आँखों के सामने का दृश्य देखकर बहुत खुश हुईl दिशांत अपने सिलेबस की किताबों को बड़ी तल्लीनता से पढ़ रहा थाl “जाग गई माँ?” माँ को देखकर दिशांत बोलाl “हाँ बेटा! पर आज सूरज पश्चिम से कैसे निकल आया?” किताबों की तरफ माँ ने इशारा करते हुए दिशांत से कहाl “अगले महीने एग्जाम हैं न माँl बस उन्हीं की तैयारी कर रहा हूँl” माँ दिशांत में अचानक आए इस परिवर्तन से आश्चर्यचकित भी थी और खुश भीl दिन पर दिन गुज़रते गए, परीक्षाओं के बाद आज दिशांत की माँ और खुद दिशांत के लिए वो दिन आ गया जो उन दोनों के लिए ख़ास थाl स्टोरी-राइटिंग कम्पटीशन का दिनl सुबह-सुबह माँ ने दिशांत को तैयार किया, साथ ही कान के पीछे छोटा सा काला टीका लगा दिया ताकि आज उसके बेटे को कोई भी बुरी नज़र न लगेl स्कूल कैंपस में पहुँचते ही दिशांत ने स्टूडेंट्स की भीड़ को देखा जिनमें उसके साथ के, बाकी और भी कई स्कूल के बच्चे थे जिन्होंने कम्पटीशन में हिस्सा लिया थाl थोड़े ही समय में कम्पटीशन शुरू हुआl सभी अपनी-अपनी कहानी लिखने में व्यस्त थेl “दिशांत बेटा, तुमने अभी तक लिखना शुरू नहीं किया?” दिशांत की टीचर ने बड़ी ही नम्रता के साथ दिशांत से पूछाl “ध्यान रखो, टाइम की भी पाबंदी है इसलिए अब लिखना शुरू करोl” मैडम ने क्या कहा इस बात पर दिशांत ने गौर ही नहीं कियाl खाली पेपर पर टॉपिक के रूप में दिशांत ने पहला शब्द अंकित किया- “माँl”

        कम्पटीशन ख़त्म हुआ और सभी अपने-अपने घर को चल दिएl दिशांत भी घर पहुंचाl दरवाज़ा खोलते ही माँ ने पूछा- “कैसा गया कम्पटीशन? कौन सी कहानी लिखी?” माँ के पूछने से पता लग रहा था कि वे सुबह से ही दिशांत के आने की उत्सुकता से राह देख रही थींl “अच्छा हुआ माँl” दिशांत ने माँ की बात का जवाब देते हुए कहाl धीरे-धीरे वक़्त अपनी रफ़्तार से गुज़रता गया और आ गया दिशांत के रिजल्ट का दिनl वो भी एक नहीं, दो रिजल्टl आज कम्पटीशन रिजल्ट के साथ ही दिशांत का नाइन्थ स्टैण्डर्ड का रिजल्ट भी आ रहा थाl माँ बस भगवान से प्रार्थना कर रही थी अपने बेटे के लिएl

        “बिग एफ.एम. के ज़रिये प्रसारित शो ‘यादों का इडियट बॉक्स विथ नीलेश मिसरा’ के कम्पटीशन के विनर हम सभी के लिए और हमारे स्कूल के लिए बहुत ख़ास हैंl इन्होंने एनुअल एग्जाम में क्लास ही नहीं, स्कूल भी टॉप किया हैl” स्कूल के प्रिंसिपल ने माइक पर अपनी बात कहीl वे बोले- “आप सभी सोच रहे होंगे कि आखिर कौन है वो? जिसने इस बड़ी उपलब्धि को हासिल किया हैl वो हैं दिशांत जो कि हमारे स्कूल में नवीं कक्षा के विद्यार्थी हैंl इनको सम्मानित करने आ रहे हैं जाने-माने स्टोरी-टेलर, नीलेश मिसराl” इतना सुनने के बाद भी दिशांत को यकीन ही नहीं हो रहा था कि जिस दिशांत का नाम अभी-अभी प्रिंसिपल सर ने लिया था वो वही दिशांत था या कोई और? सवालों और विचारों के द्वंदों के बीच निशांत स्टेज पर पहुँच गयाl नज़र उठाई तो देखा कि जिन नीलेश मिसरा की कहानियाँ वो रोज़ रात को जागकर, एफ.एम. पर सुनता था वही नीलेश मिसरा आज उसके सामने खड़े हुए थे दिशांत को सम्मानित करने के लिएl वो भी अपने हाथों में एक नहीं, दो ट्रॉफी सेl नीलेश जी ने आगे बढ़कर ट्रॉफी मुस्कान के साथ दिशांत को थमा दीं और कहा- “मुझे गर्व है अपने भारत के इन हीरों परl” अपने हाथों में ट्रॉफी लेते हुए निशांत को आज गर्व महसूस हो रहा था और मन ही मन भगवान को थैंक्स कह रहा था इतनी अच्छी माँ देने के लिएl “ये ट्रॉफी मैं अपनी माँ को समर्पित करता हूँl बिना माँ के सहयोग से मैं इन्हें नहीं पा सकता थाl थैंक्स माँl” दिशांत ने माइक पर माँ के लिए ये सुनहरे शब्द कहेl पूरा ऑडिटोरियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठाl घर आते ही निशांत माँ के गले से लिपट गया और स्कूल का सारा हाल सुनायाl माँ ने भी दिशांत को कसकर गले लगा लियाl दोनों माँ-बेटे की आँखें प्रेम के आंसुओं से तर-बतर हो गईंl 

        नीलेश जी के साथ स्टोरी-टेलिंग के बाद अब दिशांत के घर पर उसे बधाई देने वालों और मीडिया की भीड़ लगी हुई थीl

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शिवम यादव ‘खेरवार'
१४९/९, दिनेश नगर, एटा(उ.प्र.)-२०७००१
चलभाष- ७५०००४६७०४

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