ग़ज़ल- लोग मुझसे पूछते हैं, क्या हुआ है बोलिये ?

लोग मुझसे पूछते हैं, क्या हुआ है बोलिये ?
यानि कि लाए नमक हैं घाव अपने खोलिये I

यार ! इतने में तो हमको मौत आएगी नहीं 
ज़िन्दगी में और थोड़ा-सा ज़हर तो घोलिये I

आओ अब कि नाम लें भगवान का चोरी करें 
हाथ-मुँह सिर-पैर सब ने ठीक से हैं धो लिए ?

ख़ुदकुशी के वास्ते, सल्फ़ास कुछ रक्खे रहो 
खेत में अगली फसल के बीज तो हैं बो लिए I

आपकी ख़ातिर कई दिल तोड़ डाले 'दीप' जी 
आपकी ज़ानिब चले तो आप उनके हो लिए I

दीपक शर्मा ‘दीप’
वाराणसी (उत्तर प्रदेश)

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