भारत प्रगति की ओर क्यों नहीं

 मुगलों के शासन के पश्चात भारत देश पर अंग्रेजों का शासन प्रारम्भ हुआ। अंग्रेजी हुकूमत से इस देश को बहुत क्षति हुई। जब अंग्रेजों ने पूरे देश पर अपना अधिकार कर लिया तो यहां की सत्ता छिन्न-भिन्न हो गई अन्तिम मुगल शासक बहादुर शाह ज़फर को बन्दी बनाकर उसकी हत्या कर दी गई और मुगल परिवार के लोगों पर अत्याचार किए गए। इस प्रकार भारत लूट लिया गया तथा जनता के प्रति अत्याचार, शोषण, जुल्म-सितम किया गया, जिससे यहाँ की जनता सड़कों पर आ गई किसी के पिता की हत्या की गई तो किसी की माँ के साथ दृष्व्यवहार किया गया भाई-भाई से जुदा हो गया यहाँ तक कि अंग्रेजों ने उनके प्रति जितने हथकंडे अपनाए वो उन्होंने कर डाले। किसी भी भारतीय के साथ कोई दयाभाव का बर्ताव नही किया गया। यह देश किसी समय में सोने की चिडि़या के नाम से जाना जाता था जिसे नष्ट करने में बाहर से आए आक्रमणकारी सिद्ध हुए और इस देश की सारी सम्पत्ति लूट कर ले गए, परिणाम यह हुआ की देश खोखला होता गया। 

        आज हमारे देश को लगभग 68 वर्ष हो चुके हैं लेकिन इसकी स्थिति अभी भी सृदृढ़ नहीं हो सकी, इसमें वही अराजकता और भ्रष्टाचार जैसी बीमारियों ने जन्म ले लिया है। कोई भी व्यक्ति अपने कर्त्तव्य का पालन करने में खरा नहीं उतरता प्रत्येक व्यक्ति को कुर्सी चाहिए, धन दौलत चाहिए चाहें वह किसी गरीब के शोषण से प्राप्त हो या उसका खून चूसकर बस उसे यही लालसा रहती है। उसे अपने देश को भोली-भाली जनता पर दया तक नहीं आती। 

        मैं यह बात आत्मविश्वास के साथ कह सकता हूँ कि इस देश को पहले तो अंग्रेजो और बाहर से आए योद्धाओं ने तबाह करने का प्रयास किया और जो कुछ बचा था उसको यहाँ के नेताओं और मन्त्रियों ने नोच-नोच कर बर्बाद कर दिया। विभाग कोई सा भी क्यों न हो सबके सब भ्रष्ट हो चुके हैं और यह भ्रष्टाचार देश में निरन्तर वेग से बढ़ता जा रहा है। जिसका शिकार कोई एक व्यक्ति ही नहीं, बल्कि पूरा देश हो रहा है। इसी कारण देश में कोई व्यवस्था नहीं हो पा रही है प्रत्येक आदमी इसके जंजाल में फंसा हुआ है कोई भी इसे घिनौना काम नहीं समझता सबके सब धन एकत्रित करने में जुटे हैं। आज छोटा सा छोटा काम बिना रिश्वत के नहीं होता पहले उनकी जेब गर्म करो बाद में काम की सुनवाई होगी। अधिकारी से लेकर चपरासी तक इस आग में जल रहा है तब तक उनका क़लम नहीं हिलता जब तक उनकी चाय पानी की व्यवस्था का प्रबन्ध न हो। कार्यालय में जाइए वहाँ रिश्वत, शिक्षालय में जाइए वहाँ रिश्वत, बैंकों में जाइए तो रिश्वत जहाँ जाइए वहाँ रिश्वत कोई काम आज इसके बिना नहीं होता। यह पूरी की पूरी जंजीर ऊपर से लेकर नीचे तक और नीचे से ऊपर तक सबकी सब जुर्मानालय बन चुकी है यहाँ तक की पुलिस विभाग में तो सिर फोडि़ए तो रिश्वत, न फोडि़ए तो रिश्वत, तहरीर लिखाई तो रिश्वत अदालत और कचहरियों की स्थिति भी ऐसी है वहाँ सच और झूठ कोई चीज़ नहीं केवल सबूत चाहिए जिसे रुपये देकर खरीदा जाता है और ग्वाह एक मिनट में अपना ब्यान बदल कर सत्यता को भूल जाता है। जिसका खामियाना बेकसूर लोगों को भुगतना पड़ता है।

        आज देश में विकास की आवश्यकता है यदि देश में ऐसी स्थिति बनी रही तो देश का उद्धार कैसे होगा, इसमें सुधार कैसे होगा आज यह एक बड़ा प्रश्न चिन्ह है। आज हमारा देश दूसरे देशों की अपेक्षा बहुत पीछे है इसमें तकनीकी का अभाव है और नई-नई खोजों की आवश्यकता। दूसरे देश कितनी ऊँचाइयों पर हैं वे आकाश में उड़ने की चेष्ठा करते हैं लेकिन हम उसकी कल्पाना भी नहीं कर पाते। इसका कारण यही है कि हम अपने कर्त्तव्य का पालन नहीं करते अपने काम को जिम्मेदारी नहीं बल्कि मजबूरी समझकर करते हैं। 

        आज देश के बड़े-बड़े ठेकेदार जिनकी प्यास गरीबों के खून से बुझती है वो देश के तिरंगे को लहराता देखना नहीं चाहते वो इसमें विकास की किरन पसन्द नहीं करते न उन्हें किसी से हमदर्दी वो तो अपना स्वार्थी जीवन व्यापन कर रहे हैं। आज देश का हर नागरिक जिम्मेदार नहीं बल्कि ठेकेदार बना बैठा है कि कब अवसर मिले और इसे हड़प लिया जाए। 

        यदि हम अपने देश मे तरक्की चाहते हैं तो हमें सत्यता और ईमानदारी से इसकी सेवा करनी चाहिए तथा अपने काम को काम समझकर करना चाहिए न कि उसे मजबूरी समझकर उसे अपने कर्त्तव्य का सदैव पालन करते रहना चाहिए तभी देश का विकास होगा, तभी देश में अमन-चैन और सुकून होगा। यदि हम अपनी जिम्मेदारियों को नहीं समझ पाए तो स्थिति यही रहेगी जो आज है। हम सबको मिलकर देश के लिए समाज के लिए कुछ न कुछ करना चाहिए जो दूसरों का हक है उसे मिलना चाहिए। हम भारत में जन्में है हम यहाँ की मिट्टी में सुगन्ध देखना चाहते हैं न कि दुर्गन्ध। 




मोहम्मद हसीब
स्नातकोत्तर (उत्तरार्ध)
ए.एम.यू., अलीगढ़

1 comment:

  1. हसीब भाई बहुत ही सुन्दर लेख ।लेकिन अब स्थितियां अपने हाथ में कहाँ बची है,भष्टाचार की जड़े अब इतनी गहरी जम चुकी है कि उन्हें उखाड़ फेकना मुश्किल है।

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