गिद्ध

गिद्धों को
कभी-कभी ही
मिलता हैं मौका
मांस नोचने का
रोज कहाँ मरते हैं पशु
ये काम मौसमी है,
अगर कभी
मन करे तुम्हारा
मांस नोचने का
शरमाना मत,
गिद्ध कभी भी
शरमाते नहीं
और नही
छोड़ते हैं कोई अवसर,
तुम भी
मत चूकना मौका
नोच डालना शरीर
कर डालना
नग्न इन्सानियत,
रोज नहीं मिलता हैं मौका
गिद्धों को मांस खाने का
क्योंकि
ये काम मौसमी है।

रौशन जसवाल ‘विक्षिप्त’
सम्पर्क, शान्त कंवल कुंज, ढली शिमला

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