हौसला

आँधियाँ पूछती नहीं रास्ता फ़िज़ाओं से
पंछियों ने कब मांगी परवाज़ हवाओं से।

धधकती कोशिशों को बुझाने की औकात नहीं इनकी
डर न जाना रात को गरजती घटाओं से।

सुलगने दो सीने में सुलगते अंगारों को
कबतक लोगे रोशनी बेनूर सितारों से।

ऐ नाविक तू बीच समन्दर जंग का एलान कर
मांगना मत कोई मदद इन किनारों से।

हर मुश्किल को मात देगा हौसला बनाए रख
हारकर न बैठना इन सख्त सज़ाओं से।

उनको दुआ करने दे तू धार दे कटार को
किसने जीती जंग इनको री दुआओं से।


विनोद कुमार दवे
पाली, राजस्थान
मोबाइल - 9166280718
ईमेल - davevinod14@gmail.com

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