ले तराश कर तुझे रख दिया

ले तराश कर तुझे रख दिया
अब तू बता कि मैं क्या करूँ ?

तुझे मान लूँ भगवान  या
किसी हादसे की दोआ करूँ ?

ले तराश कर तुझे रख दिया...
यही शर्त है, यही शर्त थी 

जो किसी ने ‘खूब’ बना दिया 
वो जो हाथ कारीगरों के हैं 

उसे काट दो, उसे काट दो I
ले तराश कर तुझे रख दिया...

न ही मेरा तार्रुफ़ अनलहक़
न ही मैंने खुद को भला कहा 

मैं एक प्यादा, गुलाम हूँ 
तुझे जैसे चलना हो चल मुझे I

ले तराश कर तुझे रख दिया...
न ज़ुबाँ मिरी न जिसम मिरा 

न ही रूह का हक़दार मैं 
जो बता मुझे वही बोल दूँ

तिरी नींद है तिरा ख़्वाब है I
ले तराश कर तुझे रख दिया...

मुझे होश है, बेहोश हूँ 
मुझे इसका भी तो पता नहीं 

मुझे लोग कहते रहे हैं क्यों 
मुझे क्या हुआ मुझे क्या हुआ 
ले तराश कर तुझे रख दिया..

दीपक शर्मा ‘दीप’
वाराणसी (उत्तर प्रदेश)

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